कुछ गलत मान्यताएँ anxiety को बनाए रखती हैं और और बढ़ाती हैं। इन्हें एक-एक करके ठीक करते हैं।
Anxiety हमारे जीवन को कई जगह पर affect कर सकती है। किसी को social anxiety होती है — दूसरों के सामने आने में झिझक। किसी को agoraphobia — घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोग इसे ऊपरी चक्कर या जादू-टोने से जोड़ने लगते हैं।
जबकि सच यह है — anxiety एक behavioral problem है। Brain के chemical process से related। Nervous system का over-sensitization — जिसे समझकर ठीक किया जा सकता है।
और जब anxiety के बारे में जो गलत मान्यताएँ मन में होती हैं — वे anxiety को और बढ़ाती हैं। जैसे "पागल हो जाऊँगा" — यह सोचना ही panic को बड़ा करता है। जब सच पता चलता है, fuel कम होता है। Anxiety कमज़ोर पड़ती है।
"मैं कमज़ोर हूँ — इसीलिए anxiety है।"
Army, दमकल, police के जवान भी इसके शिकार हुए हैं। एक police chief जिनके नीचे 300 लोग काम करते थे — वे anxiety में hair salon में नहीं बैठ सके। बहादुरी का anxiety से कोई सम्बन्ध नहीं।
"Panic में मैं मर जाऊँगा।"
दुनिया में आज तक एक भी case नहीं जिसमें कोई panic या anxiety में सांस रुकने से मरा हो। यह शरीर का false alarm है — intense है, dangerous नहीं। आपकी body खुद को handle करना जानती है।
"मैं पागल हो जाऊँगा।"
आज तक दुनिया में एक भी case नहीं जिसमें anxiety से कोई पागल हुआ हो। ये दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। जो डर आपको है कि "मैं पागल हो जाऊँगा" — यही डर तो बताता है कि आपका दिमाग बिल्कुल ठीक है।
"मुझे कोई serious बीमारी है।"
Anxiety कोई बीमारी नहीं — एक disorder है। Disorder यानी जब कोई चीज़ order में न हो। बस। और जो चीज़ order से बाहर है, उसे वापस order में लाया जा सकता है। आप बिल्कुल ठीक होने वाले हैं।
"Heart attack आ जाएगा।"
Anxiety में heart attack का डर बना रहना बहुत आम है। लेकिन जिनकी reports normal हैं — उन्हें anxiety में heart attack नहीं आता। यह एक intense feeling है, कोई physical खतरा नहीं।
"मेरे अजीब और गंदे विचार मुझे कुछ करवा देंगे।"
अजीब thoughts आना anxiety में बिल्कुल आम है। आपका चिंतित दिमाग वो thoughts create कर रहा है — लेकिन thoughts action नहीं बनते। आप हमेशा अपने control में हैं।
"Panic में कुछ अजीब हरकत कर दूँगा — लोग देखेंगे।"
आप कोई अजीब हरकत नहीं कर सकते। ज़्यादा से ज़्यादा आप वहाँ से उठकर दूसरी तरफ जा सकते हैं — बस। और डर अपनी peak पर पहुँचकर वापस चला जाएगा।
"मेरी sensitivity मेरी कमज़ोरी है।"
Sensitive होना अभिशाप नहीं, वरदान है। Sensitive लोग जीवन की गहराई ज़्यादा समझते हैं। ठीक होने के बाद यही sensitivity आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगी।
"यह ऊपरी चक्कर या जादू-टोना है।"
Anxiety एक behavioral problem है — brain के chemical process से related। कोई mystery नहीं। Nervous system का over-sensitization — जिसे समझकर आसानी से ठीक किया जा सकता है।
"मैं कभी ठीक नहीं होऊँगा।"
Anxiety एक permanent identity नहीं — एक state है। जब समझ आती है, state बदलती है। मेरे साथ उन लोगों ने काम किया है जो मान चुके थे कि उनकी anxiety "अलग किस्म की" है और ठीक नहीं होगी — वे सब आज ठीक हैं।
Anxiety में body में तरह-तरह के sensations होते हैं। ये सब nervous system के over-sensitization की वजह से हैं — body में कुछ गड़बड़ नहीं है।
एंग्जायटी हो जाना जीवन में एक कॉमन सी बात है।
आप अकेले नहीं हैं। दुनिया में कितने ही लोग एंग्जायटी से किसी न किसी रूप में जूझ रहे हैं।
एंग्जायटी ठीक होने वाली सिचुएशन है। यह हमेशा नहीं रहने वाली। बस इस पर काम करने की देर है।
एंग्जायटी में आपकी बॉडी में तरह तरह के सिम्पटम्स या सेंसेशन पैदा हो सकती है, डर और डिस्कम्फर्ट फील हो सकता है लेकिन आपकी बॉडी में कुछ भी गड़बड़ नहीं है। वह एक दम से परफेक्ट है और नैचुरली सही फंक्शन कर रही है। और एंग्जायटी के कारण कोई नयी बीमारी नहीं लगने जा रही है।
एंग्जायटी कायरता की निशानी नहीं है बल्कि आप बहुत बहादुर हैं जो इसे झेलते भी हैं और अपने रोजमर्रा के काम भी निबटाने होते हैं। अच्छी खबर ये है कि आपकी ये बहादुरी जाया नहीं जाने वाली बल्कि इससे आपको खूबसूरत जीवन पाने का अवार्ड मिलने जा रहा है। आप एक जीवन के विजेता, अधिक परिपक्व और मजबूत बनने जा रहे हैं। एंग्जायटी का बहादुरी लेवल से कोई लेना देना नहीं होता। मैंने कई डिपार्टमेंट के जैसे आर्मी, दमकल व पुलिस के लोगो के साथ उनके इलाज पर काम किया है। उनका कहना था कि कहीं आग बुझाने के लिए कूद जाने या गोलियां चल जाने में भी ड्यूटी पर बहादुरी दिखाना उतना मुश्किल चुनौती नहीं लगती थी लेकिन पैनिक अटैक बड़ी चुनौती लगती है। एक बार मै एक पुलिस चीफ जिसके नीचे 300 पुलिस वाले काम करते थे। उसका एंग्जायटी का अनुभव पढ़ रहा था। उसका कहना था कि वह एंग्जायटी के डर में हेयर सैलून में नहीं बैठ सका।
एंग्जायटी शर्मनाक बात नहीं है।
एंग्जायटी मेन्टल तौर से कमजोरी की निशानी नहीं है। आप थॉट्स और डाउट्स को आम लोगो से ज्यादा और बेहतर रूप से रोजाना डील कर रहे हैं। तो आप कमजोर कहाँ से हुए। एंग्जायटी के बोझ के साथ साथ आप रोजमर्रा के काम भी निबटाते हैं। सचमुच ये बहुत साहस का काम है। मैं हमेशा कहता हूँ ऐसे व्यक्ति को एक ब्रेव अवार्ड दिया जाना चाहिए। आप सचमुच बहादुर है।
सवेंदनशील होना, सेंसिटिव होना कोई अभिशाप नहीं है जैसा कि अभी आपको लग रहा होगा, बल्कि सवेंदनशील होना ही आपके लिए वरदान साबित होने जा रहा है। सवेंदनशील लोग ही जीवन की गहराई को ठीक से समझते हैं और उनकी यही समझ उनके जीवन को एक नया पॉजिटिव रूप देती है।
आपको एंग्जायटी है लेकिन आप एकदम नार्मल है। बस आपका नर्वस सिस्टम ओवर सेंसिटाइज़ड है। इसके अलावा आपके साथ रत्ती भर भी कुछ गलत नहीं है।
आप ना तो पागल होने जा रहे हैं। ना बेहोश होके गिरने वाले हैं। आपका दिमाग एकदम स्वस्थ है। और कभी एंग्जायटी से पागल नहीं होंगे। आज तक एक भी केस दुनिया में नहीं है जिसमे एंग्जायटी में कोई पागल हुआ हो। या बेहोश हुआ हो। आपकी बॉडी खुद को हैंडल करना अच्छी तरह जानती है।
आप पैनिक या सांस रुकने से मरने नहीं जा रहे हैं। आज तक एक भी केस दुनिया में नहीं है जो पैनिक या एंग्जायटी में सांस रुकने से मरा हो। आपकी बॉडी केवल इसलिए नहीं मर जाएगी क्युकी आपको मरने के विचार आ रहे हैं। आपकी बॉडी खुद को हैंडल करना अच्छी तरह जानती है।
आपको कुछ भी केवल इसलिए नहीं हो जायेगा क्युकी आपको वैसे विचार आते हैं।
आप अपने आप को नुक्सान नहीं पंहुचा सकते चाहे कितने भी क्रेजी विचार आपको आते हो। दरअसल आपका चिंतित दिमाग वो थॉट्स क्रिएट कर रहा है। उससे ज्यादा कुछ भी बुरा आपके साथ नहीं होने जा रहा।
अजीब थॉट्स आना, गंदे थॉट्स से डर जाना सब आम बात है। आपका डर इस बात की निशानी है कि आप को होश है कि क्या हो रहा है आपके साथ। इसलिए आप एंग्जायटी में अपना मानसिक संतुलन कभी नहीं खोने वाले।
आपको कोई भी हार्ट अटैक की समस्या नहीं है यह आप पहले ही निश्चिंत कर चुके हैं। एंग्जायटी में हार्ट अटैक का डर बना रहना आम बात है। लेकिन कोई हार्ट अटैक कभी नहीं आता।
ड्राइविंग करने में डरना, पसीना आना, मुँह सुखना, मुँह में अजीब सा स्वाद, पेट में समस्या, एसिडिटी, दस्त, घबराहट, चेस्ट में दर्द, जी मिचलाना, आँखों में थकान और चिपचिपापन लगना या धुन्धली रौशनी या गले में खिचाव महसूस होना, अकड़न या बॉडी में कंही टेंशन या खिंचाव या सनसनी या अजीब सा फील होना या कोई नयी सेंसेशंस एंग्जायटी में आपको डिस्कम्फर्ट फील करा सकती है लेकिन बिगाड़ कुछ नहीं सकती। कुछ देर में ये अपनी चोटी (Peak) से वापस नीचे आ जाती है। सर में भारीपन या थकान लगना नार्मल है। बॉडी में कुछ भी नुक्सान नहीं हो रहा है। ना इससे आपको कमजोरी आने वाली है। ये सब एक बॉडी और माइंड के बीच जो नेचुरल नर्वस मैकेनिकल सिस्टम है उसका ओवर सेंसिटाइज़ हो जाना है। यह केवल नेचुरल बायोकैमिकल रिएक्शन है।
डर से आप मरने वाले नहीं है। कोई आज तक एंग्जायटी में डर से नहीं मरा। बल्कि डर आता ही इसलिए है कि खतरे से आपकी रक्षा कर सके। खतरे में आप भाग सके या लड़ सके। इसी को बायोलॉजी की भाषा में फाइट और फ्लाइट मैकेनिज़्म कहते हैं। आपका दिमाग में बस एक झूठा खतरा बैठ गया है।
यह डर कि लोग क्या सोचेंगे आपके बारे में अगर आपने पैनिक अटैक के समय कुछ अजीब हरकत कर दी। लेकिन आप रिलैक्स हो जाईये। आप कोई अजीब हरकत नहीं कर सकते। आप हमेशा अपने कण्ट्रोल में रहने वाले हैं। आप ज्यादा से ज्यादा वंहा से उठ के दूसरी तरफ जा सकते हैं। और डर अपनी पीक पर वापस आके चला जायेगा।
एंग्जायटी कोई बीमारी नहीं हैं। यह केवल एक डिसऑर्डर है। डिसऑर्डर का मतलब जब कोई चीज़ आर्डर में ना हों। बस। आर्डर में नहीं रहना कोई बीमारी नहीं होती। वापस आर्डर में लाया जा सकता है।
आप कोई साइको नहीं हो गए हैं। वह बिलकुल दूसरी चीज़ होती हैं। एंग्जायटी बहुत कॉमन चीज़ है जो सभी में होती है। आपके केस में बस उसका लेवल थोड़ा बढ़ गया है। जिससे आपको चीज़ें इतर बितर दिखाई दे रही हैं। ये फिर से ऑर्गेनाइज हो जाएँगी। तब आपको सब नार्मल लगने लगेगा। तो आपको कोई मेन्टल बीमारी नहीं है। एंग्जायटी केवल एक Behavoural प्रॉब्लम है। जिसे आसानी से सुधारा जा सकता है।
अंत में — आप बाकी आम लोगों की तरह ही normal हैं। कई बार लोग जान भी नहीं सकते कि आप अंदर से किसी problem से जूझ रहे हैं। इसलिए ये मत सोचिये कि आपको कुछ अजीब हो गया है। कि लोग आपको देखकर कुछ सोचेंगे। वो कुछ नहीं सोच सकते क्यूंकि ऊपर से आप एकदम नार्मल ही होते हैं।
आपको बस anxiety हो गई है — जो लोगों को common anxiety होती है, आपको उनसे थोड़ी ज़्यादा हो गई। आपको एंग्जायटी की भी चिंता हो गयी है। बस। इससे ज़्यादा कुछ नहीं। तो निश्चिंत हो जाइए — आप ठीक होने जा रहे हैं — और यह journey शुरू करने की देर हैं।
अगला और आखिरी भाग — anxiety एक वरदान भी हो सकती है। पढ़ने से पहले judgment मत कीजिएगा।