Panic attack अचानक नहीं आता। एक chain होती है। जब यह chain दिखने लगे — तो डर थोड़ा कम हो जाता है।
आप अपने डॉउट को दूर करने के लिए हार्ट चेकअप कराते हैं। रिपोर्ट में सब कुछ नार्मल मिलता है। फिजिशियन से दवाईयां खाते हैं। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको समझ नहीं आता आखिर हमारी प्रॉब्लम है क्या। आपको यह अचानक से कहीं भी पैनिक क्यों आता है।
जहाँ भी पैनिक आता है वहां से आप बचने की कोशिश करने लगते हैं। अक्सर पैनिक ऐसी जगह ज्यादा आ रहा होता है जहाँ आपको रुकना पड़ जाये या जहाँ से आप भाग नहीं सकते । जैसे सलून की चेयर पर बैठने में, या ट्रैन में या किसी बस या फ्लाइट में बैठने में, या लोगों के बीच बैठने में। या जहाँ आपको लगे कि यहां से उठकर नही जा सकते। या ऐसी जगह जहां आपको लगे कि आपको यहाँ कोई इमरजेंसी में बचाने वाला नहीं मिलेगा। तब पैनिक की सेंसेशन शुरू होने लगती है। और आप पैनिक से बचना चाहते हैं लेकिन आपका उस पर कोई वश नहीं चलता और पैनिक अटैक आ चुका होता है। पूरी बॉडी और माइंड को हिला जाता है।
यह सुनने में अजीब लगता है — जब इतना भयानक लग रहा हो तो "false alarm" कैसे?
लेकिन यही सच है। शरीर का alarm system एक ऐसे खतरे पर fire हो रहा है जो असल में वहाँ नहीं है। वह sensation real है — लेकिन खतरा real नहीं।
1. आप पैनिक अटैक से मरने वाले नहीं हैं। पैनिक अटैक या anxiety की सनसनी हमें होश खोने या मौत के करीब होने का एहसास दे सकती है लेकिन यह फाइट और फ्लाइट प्रतिक्रिया की जैव रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्यादा कुछ नहीं है। ना आप होश खोएंगे और न ही आप पैनिक अटैक से मरेंगे। आप सुरक्षित हैं और आपका शरीर जितना आप सोच सकते हैं उससे कहीं अधिक खुद को संभाल सकता हैं। दुनिया भर में एक भी ऐसी रिपोर्ट नहीं है जिसमे कोई पैनिक अटैक से मरा हो।
2. डर एक लहर की तरह आता है और अपने Peak पर आके वापस चला जाता है। यह इतना बुरा कभी नहीं होने वाला है कि यह आपको मार दे। लहर का शिखर छूने के बाद यह तब नैचुरली अपने आप कम हो जाता है। फिर से पैनिक अटैक आ जाने से डर लगने लगता है और चूँकि आप जानते नहीं कि इससे कैसे निबटा जाए तो यही डर फिर से अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता हैं। और फिर वापस डाउन भी हो जाता है। डाउन होने के बाद आपकी बॉडी पूरी थकी हुयी या निढाल जैसी हो जाती है।
3. कभी पैनिक अटैक / एंग्जायटी होने पर शर्म महसूस न करें। मुझे पता है कि आप अपनी एंग्जायटी की समस्या को एक शर्मनाक रहस्य की तरह छिपाए रखते हैं क्योंकि आप डरते हैं कि दूसरे क्या सोचेंगे। भूल जाओ वो क्या सोचते हैं क्युकी ज्यादातर लोगों को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि पैनिक अटैक या पूरे दिन की एंग्जायटी में रहना कैसे लगता है। वो आपको नॉर्मल ही समझते हैं।
आप इस समस्या से निपटने के लिए पहले से ही बहुत बहादुर हैं। क्यूंकि आप इसका मुकाबला करते ही आ रहे हैं। बस जरूरत है तो सही गाइडेंस में सही मुकाबला करने की। मेरे साथ वह सही गाइडेंस आपको मिल जाएगी। ऐसा भी हो सकता है कि आपको पैनिक अटैक कभी ना आया हो लेकिन जनरल एंग्जायटी बनी रहती हो। मेरे साथ से इससे भी आपको छुटकारा मिलने जा रहा है। मैंने ऐसे लोगो के साथ काम किया है जिन्होंने अपने आप को घर में लॉक कर लिया था और सोचा था कि अब वो कभी ठीक नहीं होंगे। कुछ लोगो ने माना हुआ था कि उनकी एंग्जायटी बाकी लोगो से डिफरेंट है और ये ठीक नहीं हो सकती। और वो सब मेरे साथ चलकर ठीक हुए हैं और आज तंदरुस्त हैं।
अगला भाग — क्यों सब आज़माने के बाद भी कुछ काम नहीं किया। यह समझना ज़रूरी है।