मानस गाइड

पैनिक अटैक — क्या होता है, और कैसे तोड़ें — मानस गाइड
एंग्ज़ाइटी गाइड · भाग
०३ / ०६

Panic Attack —
एक चक्र है जिसे तोड़ा जा सकता है।

Panic attack अचानक नहीं आता। एक chain होती है। जब यह chain दिखने लगे — तो डर थोड़ा कम हो जाता है।

वह चक्र

Panic कैसे बढ़ता है — step by step।

०१
कोई sensation होती है
शुरुआत में हमें कोई अनजाना डर या Usual या अनयूजुअल सेंसेशन बॉडी में फील होना शुरू होती है। जैसे हार्ट बीट तेज होना, चक्कर , छाती या गले में टाइटनेस खिंचाव , शोर्टनेस ऑफ़ ब्रीथ यानि सांस लेने में मुश्किल, पिन और सुइना चुभना, सांस कम आना, या बॉडी में ही कुछ अजीब सी सेंसेशन।
०२
घबराहट बढ़ती है
उस वक्त ऐसा लगता है जाने अब क्या होगा। उस अनजाने वक्त में हम खुद को अकेला पाते हैं। जिसे कुछ समझ नहीं आ रहा होता कि क्या होने जा रहा है। उस वक्त पर कुछ को लगता है कि वो मरने जा रहे हैं । कुछ को कोई अजीब और घबराने वाली थॉट आती है। माइंड रुक ही नहीं रहा है तो उन्हें लगता है कि वो पागल होने जा रहे हैं, माइंड से कण्ट्रोल खोने जा रहे हैं। घबराहट बढ़ती है। यही trigger है।
०३
Panic आता है
अब ऐसे डॉउट और अजीब सेंसेशन में आप वहां घबरा जाते हैं। आपके घबराते ही शरीर का fight-or-flight system activate होता है। Adrenaline surge होती है। जो थोड़ी घबराहट थी — वह पूरे panic attack में बदल जाती है।
०४
डर का डर
"थोड़ी देर में पैनिक डाउन हो जाता है लेकिन आप उस Experience से और ज्यादा घबरा जाते हैं। पैनिक जाने के बाद शरीर अभी भी तनाव में रहता है। घंटों तक बेचैनी। आप उस Experience से और ज्यादा घबरा जाते हैं। आपको डर रहने लगता है कि कहीं यह पैनिक फिर से ना आ जाये। अब आप उस डर में जीने लगते हैं। यानि फियर ऑफ़ फियर। डर के ही डर में जीने लगते हैं। और यही डर — शरीर को alert रखता है, sensations बढ़ाता है, और अगला पैनिक के लिए लूप का काम करता है।
इसका अनुभव

Panic attack के बाद ?

"पैनिक अटैक के बाद मूड एकदम डिप्रेस हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे बॉडी में कोई ताकत ही ना रही हो। पैनिक अटैक के बाद बॉडी में एंग्जायटी सी हमेशा दौड़ती रहती है। बॉडी में यूजुअल या अनयूजुअल अजीब सी सेंसेशन हमेशा बरकरार रहती हैं। आप अपने आप को कहीं फंसा हुआ फील करते हैं।

आप अपने डॉउट को दूर करने के लिए हार्ट चेकअप कराते हैं। रिपोर्ट में सब कुछ नार्मल मिलता है। फिजिशियन से दवाईयां खाते हैं। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको समझ नहीं आता आखिर हमारी प्रॉब्लम है क्या। आपको यह अचानक से कहीं भी पैनिक क्यों आता है।

जहाँ भी पैनिक आता है वहां से आप बचने की कोशिश करने लगते हैं। अक्सर पैनिक ऐसी जगह ज्यादा आ रहा होता है जहाँ आपको रुकना पड़ जाये या जहाँ से आप भाग नहीं सकते । जैसे सलून की चेयर पर बैठने में, या ट्रैन में या किसी बस या फ्लाइट में बैठने में, या लोगों के बीच बैठने में। या जहाँ आपको लगे कि यहां से उठकर नही जा सकते। या ऐसी जगह जहां आपको लगे कि आपको यहाँ कोई इमरजेंसी में बचाने वाला नहीं मिलेगा। तब पैनिक की सेंसेशन शुरू होने लगती है। और आप पैनिक से बचना चाहते हैं लेकिन आपका उस पर कोई वश नहीं चलता और पैनिक अटैक आ चुका होता है। पूरी बॉडी और माइंड को हिला जाता है।

"कई बार कुछ लोग ऐसी जगह अकेले जाने से डरने लगते हैं जहाँ उन्हें लगता है कि कोई हेल्प नहीं मिल पायेगी। कुछ ऐसी जगहों पर जाने से बचने लगते हैं जहाँ उन्हें लगता है कि वहां पैनिक अटैक आ सकता है। कुछ दूर जाना, मार्किट में जाना बंद कर देते हैं। कुछ व्यक्ति लोगो से मिलना बंद कर देते हैं। कुछ तो खुद को घर में ही कैद कर लेते हैं। जिसे Agoraphobia व Social anxiety नाम दिया गया है। ड्राइविंग करते वक्त, फ्लाइट में, भीड़भाड़ वाले इलाके, रात को लेटते समय कंही भी आपकी एंग्जायटी की sensation या पैनिक अटैक हो सकता है।"
सबसे ज़रूरी बात

Panic attack — शरीर का false alarm है।

यह सुनने में अजीब लगता है — जब इतना भयानक लग रहा हो तो "false alarm" कैसे?

लेकिन यही सच है। शरीर का alarm system एक ऐसे खतरे पर fire हो रहा है जो असल में वहाँ नहीं है। वह sensation real है — लेकिन खतरा real नहीं।

अगर अभी panic हो रहा हो

3 चीजें एक पैनिक अटैक के दौरान याद रखने के लिए हैं।

1. आप पैनिक अटैक से मरने वाले नहीं हैं। पैनिक अटैक या anxiety की सनसनी हमें होश खोने या मौत के करीब होने का एहसास दे सकती है लेकिन यह फाइट और फ्लाइट प्रतिक्रिया की जैव रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्यादा कुछ नहीं है। ना आप होश खोएंगे और न ही आप पैनिक अटैक से मरेंगे। आप सुरक्षित हैं और आपका शरीर जितना आप सोच सकते हैं उससे कहीं अधिक खुद को संभाल सकता हैं। दुनिया भर में एक भी ऐसी रिपोर्ट नहीं है जिसमे कोई पैनिक अटैक से मरा हो।

2. डर एक लहर की तरह आता है और अपने Peak पर आके वापस चला जाता है। यह इतना बुरा कभी नहीं होने वाला है कि यह आपको मार दे। लहर का शिखर छूने के बाद यह तब नैचुरली अपने आप कम हो जाता है। फिर से पैनिक अटैक आ जाने से डर लगने लगता है और चूँकि आप जानते नहीं कि इससे कैसे निबटा जाए तो यही डर फिर से अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता हैं। और फिर वापस डाउन भी हो जाता है। डाउन होने के बाद आपकी बॉडी पूरी थकी हुयी या निढाल जैसी हो जाती है।

3. कभी पैनिक अटैक / एंग्जायटी होने पर शर्म महसूस न करें। मुझे पता है कि आप अपनी एंग्जायटी की समस्या को एक शर्मनाक रहस्य की तरह छिपाए रखते हैं क्योंकि आप डरते हैं कि दूसरे क्या सोचेंगे। भूल जाओ वो क्या सोचते हैं क्युकी ज्यादातर लोगों को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि पैनिक अटैक या पूरे दिन की एंग्जायटी में रहना कैसे लगता है। वो आपको नॉर्मल ही समझते हैं।

याद रखें

आप इस समस्या से निपटने के लिए पहले से ही बहुत बहादुर हैं। क्यूंकि आप इसका मुकाबला करते ही आ रहे हैं। बस जरूरत है तो सही गाइडेंस में सही मुकाबला करने की। मेरे साथ वह सही गाइडेंस आपको मिल जाएगी। ऐसा भी हो सकता है कि आपको पैनिक अटैक कभी ना आया हो लेकिन जनरल एंग्जायटी बनी रहती हो। मेरे साथ से इससे भी आपको छुटकारा मिलने जा रहा है। मैंने ऐसे लोगो के साथ काम किया है जिन्होंने अपने आप को घर में लॉक कर लिया था और सोचा था कि अब वो कभी ठीक नहीं होंगे। कुछ लोगो ने माना हुआ था कि उनकी एंग्जायटी बाकी लोगो से डिफरेंट है और ये ठीक नहीं हो सकती। और वो सब मेरे साथ चलकर ठीक हुए हैं और आज तंदरुस्त हैं।

अगला कदम

चक्र दिख गया — अब आगे।

अगला भाग — क्यों सब आज़माने के बाद भी कुछ काम नहीं किया। यह समझना ज़रूरी है।