कभी-कभी शब्द नहीं मिलते यह बताने के लिए कि अंदर क्या हो रहा है। नीचे जो लिखा है — शायद वह आपकी ही बात हो।
Anxiety एक ऐसी चीज़ है जो बाहर से दिखती नहीं। इसलिए जो अंदर होता है — उसे बयान करना बहुत मुश्किल होता है। यह list पढ़ते वक्त अगर लगे “हाँ, यह मेरी बात है” — तो जान लें, आप अकेले नहीं हैं।
इन सब feelings के साथ जीना पहले से ही भारी होता है। लेकिन जब आप किसी करीबी को बताएँ — और वह कहे “बस सोचो मत” या “सब ठीक हो जाएगा” — तो वह अकेलापन और गहरा हो जाता है।
अगर यह शारीरिक बीमारी होती — जैसे टूटी हुई हड्डी — तो सब तुरंत समझ जाते, sympathy दिखाते। लेकिन anxiety बाहर से दिखती नहीं। इसलिए लोग या तो समझ नहीं पाते, या अजीब नज़र से देखते हैं।
“मैंने भी यही जिया है। जब तक कोई खुद इसे महसूस न करे — वह पूरी तरह नहीं समझ सकता। इसीलिए मैं यहाँ हूँ — क्योंकि मैं समझता हूँ।”
जो आप महसूस करते हैं — वह real है। यह आपकी कल्पना नहीं है, यह drama नहीं है, और यह कमज़ोरी की निशानी भी नहीं है।
इसे Anxiety कहते हैं। यह शरीर का एक alarm system है जो ज़रूरत से ज़्यादा sensitive हो गया है। और जब इसे समझा जाए — तो इसे ठीक किया जा सकता है।
अगर यह पढ़कर लगा कि कोई साथ हो — तो यात्रा के बारे में पढ़ें। कोई जल्दी नहीं।